नई दिल्ली: राहुल गांधी का पिछले तीन साल से उत्तर प्रदेश में लगातार घूमना दो दशकों से सत्ता से दूर कांग्रेस पार्टी के लिए रंग दिखा रहा है. न्यूज़-नीलसन ओपिनियन पोल के मुताबिक कांग्रेस पार्टी 403 सीट वाली विधानसभा में 79 सीटें जीत सकती है.चुनावों की सरगर्मियों के बीच जैसे-जैसे मतदान के दिन नज़दीक आते जा रहे हैं सभी दल अपनी-अपनी ताल ठोक रहे हैं, लेकिन ओपिनियन पोल के मुताबिक मुख्यमंत्री मायावती की पार्टी को तगड़ा झटका लग सकता है. प्रदेश त्रिशंकु विधानसभा की ओर बढ़ रहा है, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान मायावती की पार्टी को होगा.
एसपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर सकती है, वहीं बीएसपी सीटों के मामले में दूसरे स्थान पर खिसक जाएगी. कांग्रेस गठबंधन बीएसपी के करीब-करीब बराबर होगा. बीजेपी मौजूदा तीसरे स्थान से चौथे पायदान पर चली जाएगी, हालांकि उसकी सीटें बढ़ेंगी.
राज्य में चुनावों की सरगर्मियाँ के दौरान 04 से 20 जनवरी के बीच स्टार न्यूज़-नीलसन ने ताज़ा राजनीतिक स्थिति पर राज्य के 202 विधानसभा क्षेत्रों में 35,973 मतदाताओं की नब्ज टटोलने की कोशिश की.
ओपिनियन पोल के मुताबिक चार सौ तीन सीटों वाली विधानसभा में मायावती की पार्टी बीएसपी को महज़ 101 सीटों पर संतोष करना होगा, हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने 206 सीटों पर अपना क़ब्ज़ा जमाया था.
एसपी का फायदा
ओपिनियन पोल में एसपी को सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने की संभावना जताई गई है. एसपी 2007 के विधानसभा चुनावों में सौ का भी आंकड़ा नहीं पा कर सकी थी, लेकिन इस बार उसके 135 सीटें जीतने की संभावना जताई गई है. वर्ष 2007 के चुनावों में एसपी को 97 सीटें मिली थीं.
कांग्रेस के लिए माहौल साज़गार है और 2007 में महज़ 22 सीटें जीतने वाली कांग्रेस का आंकड़ा 79 पर पहुंच सकता है और इस तरह उसे कुल मिलाकर 57 सीटों का फायदा होता दिख रहा है.
अगर कांग्रेस और आरएलडी गठबंधन को एक साथ करके सीटों का आकलन किया जाए तो दोनों पार्टियों को 2007 के विधानसभा में जहां 32 सीटें मिली थी, लेकिन इस बार के चुनाव में 99 सीटें जीतने की संभावना जताई जा रही है और इस तरह उस गठबंधन को 67 सीटों का फायदा होता दिख रहा है.
इसी तरह आरएलडी का आंकड़ा पिछले चुनाव के मुकाबले 10 से 20 हो जाएगा, जबकि कांग्रेस का आंकड़ा 22 से बढ़कर 79 हो जाएगा.
सबसे बुरा हाल बीजेपी का है, हालांकि उसे सीटों का नुकसान नहीं हो रहा है. वर्ष 2007 में 51 सीटों पर संतोष करने वाली बीजेपी इस बार 10 सीटों के फायदे के साथ 61 सीटें जीत सकती हैं.
वोटिंग प्रतिशत का सवाल
दिलचस्प बात यह है कि इस बार के चुनाव में एसपी की सीटों में तो इज़ाफ़ा होने की संभावना जताई गई है, लेकिन इसके पक्ष में वोटिंग प्रतिशत बहुत कम बढ़ने की उम्मीद जताई गई है.
एसपी को 2007 के चुनाव में 25.43 फीसदी मत मिले थे जो इस बार बढ़कर 26 फीसदी होने की संभावना जताई गई है.
लेकिन बीएसपी की वोटिंग प्रतिशत में खासी कमी आएगी. बीएसपी को पिछले चुनाव में 30.43 प्रतिशत वोट मिले थे जो इस बार घट कर 23 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है.
ओपिनियन पोल के मुताबिक कांग्रेस-आरएलडी गठबंधन को इस बार 21 प्रतिशत वोट मिलने की उम्मीद है. जोकि किसी पार्टी के हक में इस कदर वोटों का बढ़ना एक रिकार्ड होगा. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-आरएलडी को 12.30 फीसदी वोट मिले थे.
बीजेपी के हक में भी वोटिंग प्रतिशत मामूली तौर पर बढ़ेगा, 2007 में करीब 17 फीसदी वोट पाने वाली बीजेपी को इस बार 18 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है.
वर्ष 2007 में बीएसपी को 206, सपा को 97, बीजेपी को 51, कांग्रेस को 22, आरएलडी को 10 और अन्य के खाते में आठ सीटें गई थीं, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग होगी यानी बीएसपी को 101, एसपी को 135, बीजेपी को 61, कांग्रेस को 79, आरएलडी को 20 और अन्य के खाते में सात ही सीटें जाएँगीं.







